महाशक्ति

Just another weblog

4 Posts

17 comments

mahashakti


Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.

Sort by:

भगवा को गाली देते कांग्रेसी

Posted On: 7 Oct, 2010  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (3 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

में

6 Comments

Hello world!

Posted On: 28 Aug, 2010  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading ... Loading ...

Others में

0 Comment

क्या हम राष्‍ट्रमंडल खेलो के आयोजक है !!!

Posted On: 28 Aug, 2010  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (3 votes, average: 3.33 out of 5)
Loading ... Loading ...

Others में

1 Comment

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

के द्वारा:

मुल्ला मुलायम सिंह के सेकुलर पाखंड को जनता भली भांति समझ गयी । साम्प्रदायिक विद्वेष से लबरेज उनकी कथनी और करनी में भारी अंतर साफ नजर आता है । 500 सालों से निरंतर चले आ रहे राममंदिर संघर्ष में हिंदुओं के लहू की अंतिम आहूति मौलाना मुलायम सिंह ने 1990 में ली थी जब उन्होंने निहत्थे कारसेवकों पर गोलियां चलवा दी थीं और सैंकड़ों कारसेवकों की लाशें सरयू में बोरे में डाल कर बहायी गयीं थी । फिर उन्होंने मस्जिद ध्वंस कें मुख्य आरोपी कल्याण सिंह से हाथ मिला लिया था लोध वोट के लिये । आज जब मुस्लिम वोट बैंक उनके हाथों से खिसक गया है तब वे फिर धर्मनिरपेक्षता का पाखंड कर रहे हैं । धर्मनिरपेक्षता का पाखंड मुल्ला मुलायम सिंह के साथ साथ कांगे्रस पार्टी भी कर रही है । अयोध्या फैसले को लटकाये रहने में ही कांग्रेस की भलाई थी । फैसला न आने पाये इस लिये उसने आर सी त्रिपाठी को मोहरा बना कर फैसले को टलवाने में कोयी कसर न छोड़ी । अब इस फैसले से उसको लगता है कि मुस्लिम वोट बैंक हाथ से निकल जायेगा तो उसके तमाम नेताओं को जूड़ी बुखार आने लगा है । फैसले के पहले ही कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह का बयान था कि राम मंदिर के लिये आर एस एस और भाजपा किसी भी हद तक जा सकती है । इसके विपरीत फैसला आने पर भाजपा और आर एस एस की टिप्पणियां बेहद संतुलित थी । उन्होंने कहा कि इस फैसले से किसी की हार जीत नहीं हुयी है । लेकिन कांगे्रस का नुकसान हो चुका था । अब कांग्रेस इस नुकसान की भरपाई के लिये मस्लिम समुदाय को कम्पन्सेट कर रही है । कल ही प्रधानमंत्री मनमोहनसिंह का बयान था कि आउट आफ कोर्ट जा कर (मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में पेंडिग है) सरकार जामिया मिलिया और अलीगढ मुस्लिम यूनिवर्सिटी को अल्पसंख्यक यूनिवर्सिटी का दर्जा देगी । अभी तक ये केन्द्रीय विश्व विद्यालय हैं और इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट में केन्द्र सरकार खुद ही इसका सैद्धांतिक विरोध कर रही है । दूसरा मामला । कल ही भोपाल में कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी ने राष्ट्रवादी संगठन आर0 एस0 एस0 की तुलना आतंकवादी संगठन सिमि से की है । यह बिल्कुल वैसा ही बयान है जैसा कि मुल्ला मुलायम सिंह ने अभी दो दिन पहले दिया था कि मुसमान अपने को ठगा महूसस कर रहे हैं । इस फैसले से मुलायम और कांग्रेस दोनों की छद्यम धर्मनिरपेक्षता की हांड़ी चूल्हे पर नहीं चढ़ पायी । राहुल गांधी इसके पहले भी कई ऐसे बयान दे चुके हैं जिससे उनके अहंकारी और तानाशाही व्यक्तित्व का पता चलता है । कांग्रेस उनको युवराज मानती है और अगला पी एम बनाने की तैयारी में है पर युवराज की बोली और आचार व्यवहार से लगता है कि उनको भारत देश के इतिहास की अधिक जानकारी नहीं है । भाजपा ने सही ही कहा कि उनको कांग्रेस के साम्प्रदायिक इतिहास पर नजर डालनी चाहिये । कुछ लोगों की यह भी राय है (जिन्हें गांधी नेहरू परिवार की कुण्डली ज्ञात है) कि उन्हें अपने खानदान के इतिहास पर भी नजर डालनी चाहिये । इधर राहुल बाबा के जिगरी उमर अब्दुल्ला इस उमर मंे लौंडहाई से बाज नहीं आ रहे हैं । उनका ताजा बयान है कि कश्मीर का भारत में अधूरा विलय हुआ था । राहुल बाबा की संगत का असर तो पड़ना ही था । न इनको भारत के इतिहास का ज्ञान है और न उनको । कश्मीर का मुख्यमंत्री एक ऐयाश नेता का ऐयाश पुत्र है । इनको इतना भी ज्ञान नहीं है कि अगर भारत सेना कश्मीर में न होती तो ये पिता पुत्र रावलपिंडी या मुल्तान की किसी सैनिक जेल की शोभा बढ़ा रहे होते । मित्रों, देश युवराजों के चक्कर में फंसता जा रहा है । पुराने लंपट जमींदारों के अघाये हुये युवराजों की फौज आज कल सत्ता के गलियारों में घूम रही है । नजरें उठा कर देखिये । चोर का बेटा चोर, भिखारी का बेटा भिखारी, सेठ का बेटा सेठ, आई ए एस का बेटा आई ए एस, डाक्टर का बेटा डाक्टर, विधायक का बेटा विधायक, मंत्री का बेटा मंत्री, सीएम का बेटा सीएम और पीएम का बेटा पीएम बन रहा है । बिहार चुनाव में टिकट भी वंशवाद के आधार पर बांटे गये हैं । संविधान में लोकतंत्र की जो परिभाषा दी गयी है वह सिर्फ चुनाव की डेट घोषित होने से चुनाव के नतीजे घोषित होने तक ही फलीभूत होती है । उसके बाद भारत में फिर वही सामंतयुग प्रभावी हो जाता है । अगर यकीं न आये तो वर्तमान स्थिति और 100 साल पहले की स्थिति दोनो की तुलना करके देख लीजिये । आम आदमी पहले की तरह ही मंहगाई, गरीबी, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी से त्रस्त है । कभी किसी अफसर से, पुलिस वाले से, मंत्री से वर्तमान में पाला पड़े तो पहले की जमीदारी व्यवस्था आंखों के सामने घूम जायेगी । थाने और कचहरी का चक्कर अगर शुरू हुआ तो आपका भगवान ही मालिक है । अब आप कहेंगे कि क्या किया जा सकता है । बहुत आसान काम है । बंदूक उठा कर किसी लाम पर नहीं जाना है । वही तरीका अपनाईये जो गांधी जी ने अपनाया था । शांति पूर्वक विरोध करिये । अपनी बात कहने से झिझकिये नहीं । जो गलत है उसकी शिकायत करिये । संपादक के नाम पत्र, आर टी आई, ब्लाग पर अपनी आवाज बुलंद कीजिये और जो सो रहे हैं और सोचते हैं कि देश ऐसा ही चलने दो उनको जगाईये । धीरे धीरे माहौल बदलने लगेगा । जय हिंद ।

के द्वारा: kmmishra kmmishra




latest from jagran